मेरे साथ / जयश्री दुदानी

मुझे तुम्हारी ताक़त बन ना है, कमजोरी नहीं तुम्हारा ग़ुरूर बन ना है, तुम्हारी कमजोरी नहीं अलग रहने है तुमसे, मगर जुदा नहीं दूर रहकर भी बनानी दूरी नहीं मुझे एक साथी बनाओ, परछायी नहीं एक हक़ीक़त साथ जीयो, कोई ख़्वाब नहीं अपना जुनून बनाओ, अपनी पागलपन नहीं एक दोस्ती निभाओ, मोहब्बत नहीं मेरे साथContinue reading “मेरे साथ / जयश्री दुदानी”

ज़िंदगी / जयश्री दुदानी

ज़िंदगी के रास्ते है मुश्किल, ये सबने कहा हमने भी मान लिया अब चलना अकेले है यहाँ इसी तरह कयी महीने और कयी साल निकल गए और हम अकेलेपन से दोस्ती करते चले गए फिर कोई आया, जिसने एक कदम रखा और मेरी दुनिया बदल गयी उसने मेरा हाथ थाम कर मुझे अपने आप सेContinue reading “ज़िंदगी / जयश्री दुदानी”

ख़्वाहिशों के क़ाफ़िले / जयश्री दुदानी

ख़्वाहिशों के क़ाफ़िले भी बड़े अजीब होते है ये गुजरते वहाँ से है जहां रास्ते नहीं होते ग़ज़ब का हौसला दिया है खुद ने हम इंसानों को वाक़िफ़ हम अगले पल से नहीं और वादे ज़िंदगी भर के लिए होते है

शायरी / उद्धव पोद्दार

मेरी ज़िंदगी मैं ख़ुशियाँ तेरे बहाने से हैआधी तुझे सताने से है, आधी तुझे मनाने से है लोग कहते है कि खामोशियाँ भी बोलती है मगर मैं अरसों से ख़ामोश हूँ और वो बरसों से बेख़बर है ज़िंदगी मैं ख़ुशियों के पीछे भागना भूल जाओगे तोह ज़िंदगी के साथ मुस्कुराना सीख जाओगे आज अरसों बादContinue reading “शायरी / उद्धव पोद्दार”

मेरे शौक दा नहीं इतबार तैनूं / मिर्ज़ा ग़ालिब

मेरे शौक दा नहीं इतबार तैनूं,आजा वेख मेरा इंतज़ार आजा ।ऐवें लड़न बहानने लभ्भना एं,की तूं सोचना एं सितमगार आजा । भावें हिजर ते भावें विसाल होवे,वक्खो वक्ख दोहां दियां लज़्ज़तां ने,मेरे सोहण्यां जाह हज़ार वारी,आजा प्यार्या ते लक्ख वार आजा । इह रिवाज़ ए मसजिदां मन्दरां दाओथे हसतियां ते ख़ुद-प्रसतियां ने,मैख़ाने विच्च मसतियां ईContinue reading “मेरे शौक दा नहीं इतबार तैनूं / मिर्ज़ा ग़ालिब”

किताबें / गुलज़ार

किताबें झाँकती हैं बंद आलमारी के शीशों सेबड़ी हसरत से तकती हैंमहीनों अब मुलाकातें नहीं होतीजो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थींअब अक्सर गुज़र जाती है कम्प्यूटर के पर्दों परबड़ी बेचैन रहती हैं क़िताबेंउन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई हैजो कदरें वो सुनाती थी कि जिनकेजो रिश्ते वो सुनाती थी वोContinue reading “किताबें / गुलज़ार”

दिले-नादां तुझे हुआ क्या है / मिर्ज़ा ग़ालिब

दिले-नादां तुझे हुआ क्या हैआख़िर इस दर्द की दवा क्या है हम हैं मुशताक और वो बेज़ारया इलाही ये माजरा क्या है मैं भी मूंह में ज़ुबान रखता हूंकाश पूछो कि मुद्दआ क्या है जबकि तुज बिन नहीं कोई मौजूदफिर ये हंगामा-ए-ख़ुदा क्या है ये परी चेहरा लोग कैसे हैंग़मज़ा-ओ-इशवा-यो अदा क्या है शिकने-ज़ुल्फ़-ए-अम्बरी क्याContinue reading “दिले-नादां तुझे हुआ क्या है / मिर्ज़ा ग़ालिब”

यह कैसी तन्हाई है / जॉन एलिया

तू भी चुप है मैं भी चुप हूँ यह कैसी तन्हाई हैतेरे साथ तेरी याद आई, क्या तू सचमुच आई है शायद वो दिन पहला दिन था पलकें बोझल होने कामुझ को देखते ही जब उन की अँगड़ाई शरमाई है उस दिन पहली बार हुआ था मुझ को रफ़ाक़ात का एहसासजब उस के मलबूस कीContinue reading “यह कैसी तन्हाई है / जॉन एलिया”

काली काली / गुलज़ार

काली काली आँखों काकाला काला जादू हैआधा आधा तुझ बिन मैंआधी आधी सी तू है काली काली आँखों काकाला काला जादू हैआज भी जुनूनी सीजो एक आरज़ू हैयूँ ही तरसने देयह आँखें बरसने देतेरी आँखें दो आँखेंकभी शबनम कभी खुशबू है काली काली आँखों काकाला काला जादू हैआधा आधा तुझ बिन मैंआधी आधी सी तूContinue reading “काली काली / गुलज़ार”

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले – मिर्जा गालिब

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकलेबहुत निकले मेरे अरमाँ, लेकिन फिर भी कम निकले डरे क्यों मेरा कातिल क्या रहेगा उसकी गर्दन परवो खून जो चश्म-ऐ-तर से उम्र भर यूं दम-ब-दम निकले निकलना खुल्द से आदम का सुनते आये हैं लेकिनबहुत बे-आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले भ्रम खुल जाये जालीमContinue reading “हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले – मिर्जा गालिब”

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